जे प्राकृत कबि परम सयाने

चौपाई ३, दोहा १४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने॥ भए जे अहहिं जे होइहहिं आगें। प्रनवउँ सबहि कपट सब त्यागें॥ ३ ॥

अर्थ

जो बड़े बुद्धिमान् प्राकृत कवि हैं, जिन्होंने भाषा में हरिचरित्रों का वर्णन किया है, जो ऐसे कवि पहले हो चुके हैं, जो इस समय वर्तमान हैं और जो आगे होंगे, उन सबको मैं सारा कपट त्याग कर प्रणाम करता हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “कवि वन्दना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा पूर्ववर्ती महाकवियों की वंदना और विनम्र भाव से रघुपति-कथा रचने के संकल्प का वर्णन है।

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कवि वन्दना