जे गावहिं यह चरित सँभारे
जे गावहिं यह चरित सँभारे
चौपाई १, दोहा ३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जे गावहिं यह चरित सँभारे। तेइ एहि ताल चतुर रखवारे॥ सदा सुनहिं सादर नर नारी। तेइ सुरबर मानस अधिकारी॥ १ ॥
अर्थ
जो लोग इस चरित्र को सावधानी से गाते हैं, वे ही इस तालाब के चतुर रखवाले हैं और जो स्त्री-पुरुष सदा आदरपूर्वक इसे सुनते हैं, वे ही इस सुन्दर मानस के अधिकारी उत्तम देवता हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य