अति खल जे बिषई बग कागा
अति खल जे बिषई बग कागा
चौपाई २, दोहा ३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अति खल जे बिषई बग कागा। एहि सर निकट न जाहिं अभागा॥ संबुक भेक सेवार समाना। इहाँ न बिषय कथा रस नाना॥ २ ॥
अर्थ
जो अति दुष्ट और विषयी हैं वे अभागे बगुले और कौवे हैं, जो इस सरोवर के समीप नहीं जाते। क्योंकि यहाँ (इस मानस-सरोवर में) घोंघे, मेंढक और सेवार के समान विषय-रस की नाना कथाएँ नहीं हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य