नहिं तव आदि मध्य अवसाना
नहिं तव आदि मध्य अवसाना
चौपाई ४, दोहा २३५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना॥ भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि॥ ४ ॥
अर्थ
आपका न आदि है, न मध्य है और न अन्त है। आपके अमित प्रभाव को वेद भी नहीं जानते। आप भाव-भव, विभव और पराभव करनेवाली हैं। विश्व को मोहित करनेवाली और स्ववश रूप से विहार करनेवाली हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद