होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु

दोहा १६६ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ। तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउ॥ १६६ ॥

अर्थ

वे ब्राह्मण किस प्रकार से वश में हो सकते हैं, कृपा करके वह भी बताइये। हे दीनदयालु! आपको छोड़कर और किसी को मैं अपना हितू नहीं देखता।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १६६ है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा