जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी

चौपाई १, दोहा १०८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी॥ तौ प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना॥ १ ॥

अर्थ

हे सुख की राशि! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं और सचमुच मुझे अपनी दासी [या अपनी सच्ची दासी] जानते हैं, तो हे प्रभो! आप श्रीरघुनाथजी की नाना प्रकार की कथा कहकर मेरा अज्ञान दूर कीजिये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद