छबिसमुद्र हरि रूप बिलोकी

चौपाई ३, दोहा १४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

छबिसमुद्र हरि रूप बिलोकी। एकटक रहे नयन पट रोकी॥ चितवहिं सादर रूप अनूपा। तृप्ति न मानहिं मनु सतरूपा॥ ३ ॥

अर्थ

शोभा के समुद्र श्रीहरि के रूप को देखकर मनु-शतरूपा ने नेत्रों के पट (पलकें) रोके हुए एकटक रह गये। उस अनुपम रूप को वे आदर सहित देख रहे थे और देखते-देखते अघाते ही न थे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मनु-शतरूपा तप एवं वरदान