जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन
जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन
दोहा १८६ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन समेत सनेह। गगनगिरा गंभीर भइ हरनि सोक संदेह॥ १८६ ॥
अर्थ
देवता और पृथ्वी को भयभीत जानकर और उनके स्नेहयुक्त वचन सुनकर शोक और सन्देह को हरनेवाली गम्भीर आकाशवाणी हुई--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पृथ्वी और देवताओं की करुण पुकार” प्रकरण का दोहा १८६ है। इस प्रकरण में रावण के अत्याचार से पीड़ित पृथ्वी और देवताओं की भगवान से करुण प्रार्थना एवं ब्रह्मा की स्तुति का वर्णन है।
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पृथ्वी और देवताओं की करुण पुकार