जानकी लघु भगिनी सकल सुंदरि सिरोमनि
जानकी लघु भगिनी सकल सुंदरि सिरोमनि
छन्द ३, दोहा ३२५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
छन्द पाठ
जानकी लघु भगिनी सकल सुंदरि सिरोमनि जानि कै। सो तनय दीन्ही ब्याहि लखनहि सकल बिधि सनमानि कै॥ जेहि नामु श्रुतकीरति सुलोचनि सुमुखि सब गुन आगरी। सो दई रिपुसूदनहि भूपति रूप सील उजागरी॥ ३ ॥
अर्थ
जानकीजी की छोटी बहिन उर्मिलाजी को सब सुन्दरियों में शिरोमणि जानकर उस कन्या को सब प्रकार से सम्मान करके, लक्ष्मणजी को ब्याह दिया; और जिनका नाम श्रुतकीर्ति है तथा जो सुन्दर नेत्रोंवाली, सुन्दर मुखवाली, सब गुणों की खान और रूप तथा शील में उज्ज्वल हैं, उनको राजा ने शत्रुघ्न को ब्याह दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का छन्द ३, दोहा ३२५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह