देखि समाजु मुदित रनिवासू
देखि समाजु मुदित रनिवासू
चौपाई ३, दोहा ३५४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि समाजु मुदित रनिवासू। सब कें उर अनंद कियो बासू॥ कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू। सुनि सुनि हरषु होत सब काहू॥ ३ ॥
अर्थ
यह समाज देखकर रनिवास प्रसन्न हो गया। सब के हृदय में आनन्द ने निवास कर लिया। तब राजा ने जिस तरह विवाह हुआ था, वह सब कहा। उसे सुन-सुनकर सबको हर्ष होता है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना