जान आदिकबि नाम प्रतापू

चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू॥ सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेईं पिय संग भवानी॥ ३ ॥

अर्थ

आदिकवि श्रीवाल्मीकिजी रामनाम के प्रताप को जानते हैं, जो उलटा नाम ('मरा', 'मरा') जपकर पवित्र हो गये। श्रीशिवजी के इस वचन को सुनकर कि एक राम-नाम सहस्र नाम के समान है, पार्वतीजी सदा अपने पति (श्रीशिवजी) के साथ रामनाम का जप करती रहती हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा