हरषे हेतु हेरि हर ही को

चौपाई ४, दोहा १९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हरषे हेतु हेरि हर ही को। किय भूषन तिय भूषन ती को॥ नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को॥ ४ ॥

अर्थ

नाम के प्रति पार्वतीजी के हृदय की ऐसी प्रीति देखकर श्रीशिवजी हर्षित हो गये और उन्होंने स्त्रियों में भूषणरूप (पतिव्रताओं में शिरोमणि) पार्वतीजी को अपना भूषण बना लिया (अर्थात् उन्हें अपने अङ्ग में धारण करके अर्धांगिनी बना लिया)। नाम के प्रभाव को श्रीशिवजी भलीभाँति जानते हैं, जिसके कारण कालकूट विष ने उनको अमृत का फल दिया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा