जगु भल कहिहि भाव सब काहू

चौपाई ३, दोहा २४९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जगु भल कहिहि भाव सब काहू। हठ कीन्हें अंतहुँ उर दाहू॥ एहिं लालसाँ मगन सब लोगू। बरु साँवरो जानकी जोगू॥ ३ ॥

अर्थ

संसार उन्हें भला कहेगा, क्योंकि यह बात सब किसी को अच्छी लगती है। हठ करने से अन्त में भी हृदय जलेगा। सब लोग इसी लालसा में मग्न हो रहे हैं कि जानकीजी के योग्य वर तो यह साँवला ही है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का सखियों सहित यज्ञशाला में प्रवेश और उनके अलौकिक सौंदर्य से सभी के मोहित होने का वर्णन है।

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श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश