हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई
हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई
चौपाई २, दोहा २४९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई। मति हमारि असि देहि सुहाई॥ बिनु बिचार पनु तजि नरनाहू। सीय राम कर करै बिबाहू॥ २ ॥
अर्थ
हे विधाता! जनक की जड़ताई शीघ्र हर लीजिये और हमारी ही ऐसी सुन्दर बुद्धि उन्हें दीजिये कि जिससे बिना ही विचार किये राजा अपना प्रण छोड़कर सीताजी का विवाह रामजी से कर दें।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का सखियों सहित यज्ञशाला में प्रवेश और उनके अलौकिक सौंदर्य से सभी के मोहित होने का वर्णन है।
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श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश