जगदंबिका जानि भव भामा
जगदंबिका जानि भव भामा
चौपाई ४, दोहा १०० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा॥ सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी॥ ४ ॥
अर्थ
पार्वतीजी को जगदम्बा और शिवजी की पत्नी समझकर देवताओं ने मन-ही-मन प्रणाम किया। भवानीजी सुन्दरता की सीमा हैं। करोड़ों मुखों से भी उनकी शोभा नहीं कही जा सकती।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात