बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाईं
बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाईं
चौपाई ३, दोहा १०० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाईं। करि सिंगारु सखीं लै आईं॥ देखत रूपु सकल सुर मोहे। बरनै छबि अस जग कबि को है॥ ३ ॥
अर्थ
फिर मुनीश्वरों ने उमा को बुलाया। सखियों ने श्रृंगार करके उन्हें ले आयीं। देखते ही उनके रूप से सब देवता मोहित हो गये। संसार में ऐसा कौन कवि है जो उस छवि का वर्णन कर सके !।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात