जद्यपि जग दारुन दुख नाना
जद्यपि जग दारुन दुख नाना
चौपाई ४, दोहा ६३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना॥ समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा। बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा॥ ४ ॥
अर्थ
यद्यपि जगत् में अनेक प्रकार के दारुण दुःख हैं, तथापि जाति-अपमान सबसे बढ़कर कठिन है। यह समझकर सतीजी को बड़ा क्रोध हो आया। माता ने उन्हें बहुत प्रकार से समझाया-बुझाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सती का दक्ष यज्ञ में जाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती का दक्ष के यज्ञ में जाना और शिवजी के अपमान से उनका क्रोधित होना का वर्णन है।
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सती का दक्ष यज्ञ में जाना