जाचक जन जाचहिं जोइ जोई

चौपाई ४, दोहा ३५१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जाचक जन जाचहिं जोइ जोई। प्रमुदित राउ देहिं सोइ सोई॥ सेवक सकल बजनिआ नाना। पूरन किए दान सनमाना॥ ४ ॥

अर्थ

याचक लोग जो-जो माँगते हैं, विशेष प्रसन्न होकर राजा उन्हें वही-वही देते हैं। सम्पूर्ण सेवकों और बाजेवालों को राजाने नाना प्रकार के दान और सम्मान से सन्तुष्ट किया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना