आयसु पाइ राखि उर रामहि

चौपाई ३, दोहा ३५१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आयसु पाइ राखि उर रामहि। मुदित गए सब निज निज धामहि॥ पुर नर नारि सकल पहिराए। घर घर बाजन लगे बधाए॥ ३ ॥

अर्थ

आज्ञा पाकर, श्रीरामजी को हृदय में रखकर वे सब आनन्दित होकर अपने-अपने घर गये। नगर के समस्त स्त्री-पुरुषों को राजा ने कपड़े और गहने पहनाये। घर-घर बधावे बजने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना