जब तें सतीं जाइ तनु त्यागा

चौपाई ४, दोहा ७५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जब तें सतीं जाइ तनु त्यागा। तब तें सिव मन भयउ बिरागा॥ जपहिं सदा रघुनायक नामा। जहँ तहँ सुनहिं राम गुन ग्रामा॥ ४ ॥

अर्थ

जब से सती ने जाकर शरीर त्याग किया, तब से शिवजी के मन में वैराग्य हो गया। वे सदा श्रीरघुनाथजी का नाम जपने लगे और जहाँ-तहाँ श्रीरामचन्द्रजी के गुणों की कथाएँ सुनने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या