सुनत गिरा बिधि गगन बखानी

चौपाई ३, दोहा ७५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत गिरा बिधि गगन बखानी। पुलक गात गिरिजा हरषानी॥ उमा चरित सुंदर मैं गावा। सुनहु संभु कर चरित सुहावा॥ ३ ॥

अर्थ

यह [इस प्रकार ] आकाश से कही हुई ब्रह्मा की वाणी को सुनते ही पार्वतीजी प्रसन्न हो गयीं और [हर्ष के मारे] उनका शरीर पुलकित हो गया। [याज्ञवल्क्यजी भरद्वाजजी से बोले कि] मैंने पार्वती का सुन्दर चरित्र सुनाया, अब शिवजी का सुहावना चरित्र सुनो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या