चिदानंद सुखधाम सिव बिगत मोह मद

दोहा ७५ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

चिदानंद सुखधाम सिव बिगत मोह मद काम। बिचरहिं महि धरि हृदयँ हरि सकल लोक अभिराम॥ ७५ ॥

अर्थ

चिदानन्द, सुख के धाम, मोह, मद और काम से रहित शिवजी सम्पूर्ण लोकों को आनन्द देनेवाले भगवान् श्रीहरि (श्रीरामचन्द्रजी) को हृदय में धारण कर (भगवान् के ध्यान में मस्त हुए) पृथ्वी पर विचरने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का दोहा ७५ है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या