देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ

दोहा २३४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि। निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि॥ २३४ ॥

अर्थ

मृग, पक्षी और वृक्षों को देखने के बहाने सीताजी बार-बार घूम जाती हैं और श्रीरामजी की छबि देख-देखकर उनका प्रेम कम नहीं बढ़ रहा है, अर्थात् बहुत ही बढ़ता जाता है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का दोहा २३४ है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।

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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन