हृदयँ बिचारत जात हर केहि बिधि

दोहा ४८ (क) · बालकाण्ड

दोहा पाठ

हृदयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ। गुप्त रूप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ॥ ४८ (क) ॥

अर्थ

शिवजी हृदय में विचारते जा रहे थे कि भगवान् के दर्शन मुझे किस प्रकार हों। प्रभु ने गुप्त रूप से अवतार लिया है, मेरे जाने से सब लोग जान जायँगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का दोहा ४८ (क) है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।

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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य