तेहि अवसर भंजन महिभारा
तेहि अवसर भंजन महिभारा
चौपाई ४, दोहा ४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहि अवसर भंजन महिभारा। हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा॥ पिता बचन तजि राजु उदासी। दंडक बन बिचरत अबिनासी॥ ४ ॥
अर्थ
उन्हीं दिनों पृथ्वी का भार उतारने के लिए श्रीहरि ने रघुवंश में अवतार लिया था। वे अविनाशी भगवान् उस समय पिता के वचन से राज्य का त्याग करके तपस्वी या साधुवेश में दण्डक वन में विचर रहे थे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।
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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य