सुनु नृप बिबिध जतन जग माहीं
सुनु नृप बिबिध जतन जग माहीं
चौपाई १, दोहा १६७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनु नृप बिबिध जतन जग माहीं। कष्टसाध्य पुनि होहिं कि नाहीं॥ अहइ एक अति सुगम उपाई। तहाँ परंतु एक कठिनाई॥ १ ॥
अर्थ
हे राजन्! सुनो, संसार में उपाय तो बहुत हैं; पर वे कष्टसाध्य हैं और फिर भी सिद्ध हों या न हों, उनकी सफलता निश्चित नहीं है। हाँ, एक उपाय बहुत सहज है; परन्तु उसमें भी एक कठिनाई है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १६७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा