हियँ हरषे कामारि तब संकर सहज
हियँ हरषे कामारि तब संकर सहज
दोहा १२० (क) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
हियँ हरषे कामारि तब संकर सहज सुजान। बहु बिधि उमहि प्रसंसि पुनि बोले कृपानिधान॥ १२० (क) ॥
अर्थ
तब कामदेव के शत्रु, स्वाभाविक ही सुजान, कृपानिधान शिवजी हृदय में बहुत ही हर्षित हुए और बहुत प्रकार से पार्वती की प्रशंसा करके फिर बोले--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का दोहा १२० (क) है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।
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श्रीरामावतार के हेतु