नाथ धरेउ नरतनु केहि हेतू

चौपाई ४, दोहा १२० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

नाथ धरेउ नरतनु केहि हेतू। मोहि समुझाइ कहहु बृषकेतू॥ उमा बचन सुनि परम बिनीता। रामकथा पर प्रीति पुनीता॥ ४ ॥

अर्थ

फिर हे नाथ! उन्होंने मनुष्य का शरीर किस कारण से धारण किया? हे वृषकेतु! यह मुझे समझाकर कहिये। पार्वती के अत्यन्त नम्र वचन सुनकर और श्रीरामचन्द्रजी की कथा में उनका विशुद्ध प्रेम देखकर--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।

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श्रीरामावतार के हेतु