धरि धीरजु तहँ रहे सयाने

चौपाई ३, दोहा ९५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

धरि धीरजु तहँ रहे सयाने। बालक सब लै जीव पराने॥ गएँ भवन पूछहिं पितु माता। कहहिं बचन भय कंपित गाता॥ ३ ॥

अर्थ

कुछ बड़ी उम्र के समझदार लोग धीरज धरकर वहाँ डटे रहे। लड़के तो सब अपने प्राण लेकर भागे। घर पहुँचने पर जब माता-पिता पूछते हैं, तब वे भय से काँपते हुए शरीर से ऐसा वचन कहते हैं--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात