राम रूपु अरु सिय छबि देखें
राम रूपु अरु सिय छबि देखें
चौपाई १, दोहा २४९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
राम रूपु अरु सिय छबि देखें। नर नारिन्ह परिहरीं निमेषें॥ सोचहिं सकल कहत सकुचाहीं। बिधि सन बिनय करहिं मन माहीं॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी का रूप और सीताजी की छबि देखकर स्त्री-पुरुषों ने पलक मारना छोड़ दिया (सब एकटक उन्हीं को देखने लगे)। सभी अपने मन में सोचते हैं, पर कहते सकुचाते हैं। मन-ही-मन वे विधाता से विनय करते हैं--
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का सखियों सहित यज्ञशाला में प्रवेश और उनके अलौकिक सौंदर्य से सभी के मोहित होने का वर्णन है।
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श्रीसीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश