हरष बिषाद ग्यान अग्याना
हरष बिषाद ग्यान अग्याना
चौपाई ४, दोहा ११६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
हरष बिषाद ग्यान अग्याना। जीव धर्म अहमिति अभिमाना॥ राम ब्रह्म ब्यापक जग जाना। परमानंद परेस पुराना॥ ४ ॥
अर्थ
हर्ष, विषाद, ज्ञान, अज्ञान, अहंता और अभिमान--ये सब जीव के धर्म हैं। श्रीरामचन्द्रजी तो व्यापक ब्रह्म, परमानन्दस्वरूप, परे से परे और पुराणपुरुष हैं। इस बात को सारा जगत् जानता है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद