पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर
पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर
दोहा ११६ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ। रघुकुलमनि मम स्वामि सोइ कहि सिवँ नायउ माथ॥ ११६ ॥
अर्थ
जो प्रसिद्ध पुरुष हैं, प्रकाश के भण्डार हैं, प्रकट रूप से पर और अपर के नाथ हैं, वे ही रघुकुलमणि मेरे स्वामी हैं--ऐसा कहकर शिवजी ने मस्तक नवाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का दोहा ११६ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद