हरष बिबस तन दसा भुलानी
हरष बिबस तन दसा भुलानी
चौपाई ४, दोहा १४८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
हरष बिबस तन दसा भुलानी। परे दंड इव गहि पद पानी॥ सिर परसे प्रभु निज कर कंजा। तुरत उठाए करुनापुंजा॥ ४ ॥
अर्थ
आनन्द के अधिक वश में हो जाने के कारण उन्हें अपने देह की सुधि भूल गयी। वे हाथों से भगवान् के चरण पकड़कर दण्ड की तरह भूमिपर गिर पड़े। कृपा की राशि प्रभु ने अपने करकमलों से उनके मस्तकों का स्पर्श किया और उन्हें तुरंत ही उठा लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।
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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान