हरित मनिन्ह के पत्र फल पदुमराग

दोहा २८७ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

हरित मनिन्ह के पत्र फल पदुमराग के फूल। रचना देखि बिचित्र अति मनु बिरंचि कर भूल॥ २८७ ॥

अर्थ

हरी-हरी मणियों (पन्ने) के पत्ते और फल बनाये तथा पद्मराग मणियों (माणिक) के फूल बनाये। मण्डप की अत्यन्त विचित्र रचना देखकर ब्रह्मा का मन भी भूल गया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का दोहा २८७ है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान