बेनु हरित मनिमय सब कीन्हे

चौपाई १, दोहा २८८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बेनु हरित मनिमय सब कीन्हे। सरल सपरब परहिं नहिं चीन्हे॥ कनक कलित अहिबेलि बनाई। लखि नहिं परइ सपरन सुहाई॥ १ ॥

अर्थ

बाँस सब हरी-हरी मणियों (पन्ने) के सीधे और गाँठों से युक्त ऐसे बनाये जो पहचाने नहीं जाते थे [कि मणियों के हैं या साधारण]। सोने की सुन्दर नागबेलि (पान की लता) बनायी, जो पत्तों सहित ऐसी भली मालूम होती थी कि पहचानी नहीं जाती थी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान