हरि सन मागौं सुंदरताई

चौपाई १, दोहा १३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हरि सन मागौं सुंदरताई। होइहि जात गहरु अति भाई॥ मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहि अवसर सहाय सोइ होऊ॥ १ ॥

अर्थ

[एक काम करूँ कि] भगवान से सुन्दरता माँगूँ; पर भाई! उनके पास जाने में तो बहुत देर हो जाएगी। किन्तु श्रीहरि के समान मेरा हितू भी कोई नहीं है, इसलिये इस समय वे ही मेरे सहायक हों।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग