एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप

दोहा १३१ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल। जो बिलोकि रीझै कुअँरि तब मेलै जयमाल॥ १३१ ॥

अर्थ

इस समय तो बड़ी भारी शोभा और विशाल (सुन्दर) रूप चाहिए, जिसे देखकर राजकुमारी मुझ पर रीझ जाय और तब जयमाल [मेरे गले में] डाल दे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का दोहा १३१ है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग