बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला

चौपाई २, दोहा १३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला॥ प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने। होइहि काजु हिएँ हरषाने॥ २ ॥

अर्थ

उस समय नारदजी ने भगवान् की बहुत प्रकार से विनती की। तब लीलामय कृपालु प्रभु [वहीं] प्रकट हो गये। स्वामी को देखकर नारदजी के नेत्र शीतल हो गये और वे मन में बड़े ही हर्षित हुए कि अब तो काम बन ही जाएगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग