हरि प्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति

दोहा १७८ (ख) · बालकाण्ड

दोहा पाठ

हरि प्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति होइ। सूर प्रतापी अतुलबल दल समेत बस सोइ॥ १७८ (ख) ॥

अर्थ

भगवान् की प्रेरणा से जिस कल्प में जो राक्षसों का राजा (रावण) होता है, वही शूर, प्रतापी, अतुल बलवान्, दल सहित उसी [लंका] में बसता है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का दोहा १७८ (ख) है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।

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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार