रहे तहाँ निसिचर भट भारे
रहे तहाँ निसिचर भट भारे
चौपाई १, दोहा १७९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रहे तहाँ निसिचर भट भारे। ते सब सुरन्ह समर संघारे॥ अब तहँ रहहिं सक्र के प्रेरे। रच्छक कोटि जच्छपति केरे॥ १ ॥
अर्थ
[पहले] वहाँ बड़े-बड़े योद्धा राक्षस रहते थे। देवताओं ने उन सबको युद्ध में मार डाला। अब इन्द्र की प्रेरणा से वहाँ कुबेर के करोड़ों रक्षक (यक्ष लोग) रहते हैं—।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार