हर गन मुनिहि जात पथ देखी
हर गन मुनिहि जात पथ देखी
चौपाई १, दोहा १३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
हर गन मुनिहि जात पथ देखी। बिगत मोह मन हरष बिसेषी॥ अति सभीत नारद पहिं आए। गहि पद आरत बचन सुनाए॥ १ ॥
अर्थ
शिवजी के गणों ने जब मुनि को मोहरहित और मन में बहुत प्रसन्न होकर मार्ग में जाते हुए देखा तब वे अत्यन्त भयभीत होकर नारदजी के पास आये और उनके चरण पकड़कर दीन वचन बोले--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग