बहुबिधि मुनिहि प्रबोधि प्रभु तब भए
बहुबिधि मुनिहि प्रबोधि प्रभु तब भए
दोहा १३८ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
बहुबिधि मुनिहि प्रबोधि प्रभु तब भए अंतरधान। सत्यलोक नारद चले करत राम गुन गान॥ १३८ ॥
अर्थ
बहुत प्रकार से मुनि को समझा-बुझाकर (ढाढ़स देकर) तब प्रभु अन्तर्धान हो गये और नारदजी श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान करते हुए सत्यलोक (ब्रह्मलोक) को चले।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का दोहा १३८ है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग