हमरें जान सदा सिव जोगी

चौपाई २, दोहा ९० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी॥ जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी॥ २ ॥

अर्थ

किन्तु हमारी समझसे तो शिवजी सदासे ही योगी, अजन्मा, अनिन्द्य, कामरहित और भोगहीन हैं और यदि मैंने शिवजीको ऐसा समझकर ही मन, वचन और कर्मसे प्रेमसहित उनकी सेवा की है--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।

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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास