सुनि बोलीं मुसुकाइ भवानी

चौपाई १, दोहा ९० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि बोलीं मुसुकाइ भवानी। उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी॥ तुम्हरें जान कामु अब जारा। अब लगि संभु रहे सबिकारा॥ १ ॥

अर्थ

यह सुनकर पार्वतीजी मुसकराकर बोलीं--हे विज्ञानी मुनिवरो ! आपने उचित ही कहा। आपकी समझमें शिवजीने कामदेवको अब जलाया है, अबतक तो वे विकार्युक्त (कामी) ही रहे !।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।

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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास