गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं

चौपाई २, दोहा २५४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं। मुदित भए पुनि पुनि पुलकाहीं॥ सयनहिं रघुपति लखनु नेवारे। प्रेम समेत निकट बैठारे॥ २ ॥

अर्थ

गुरु विश्वामित्रजी, श्रीरघुनाथजी और सब मुनि मन में प्रसन्न हुए और बार-बार पुलकित होने लगे। श्रीरघुपति ने संकेत से लक्ष्मण को रोका और प्रेम सहित अपने निकट बैठा लिया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।

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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध