बिस्वामित्र समय सुभ जानी
बिस्वामित्र समय सुभ जानी
चौपाई ३, दोहा २५४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिस्वामित्र समय सुभ जानी। बोले अति सनेहमय बानी॥ उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा॥ ३ ॥
अर्थ
विश्वामित्रजी ने शुभ समय जानकर अत्यन्त स्नेहमयी वाणी बोली—उठो, राम! शिवजी का धनुष तोड़ो और हे तात! जनक का परिताप मिटाओ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।
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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध