ग्रह भेषज जल पवन पट पाइ
ग्रह भेषज जल पवन पट पाइ
दोहा ७ (क) · बालकाण्ड
दोहा पाठ
ग्रह भेषज जल पवन पट पाइ कुजोग सुजोग। होहिं कुबस्तु सुबस्तु जग लखहिं सुलच्छन लोग॥ ७ (क) ॥
अर्थ
ग्रह, औषधि, जल, वायु और वस्त्र--ये सब भी कुसंग और सुसंग पाकर संसार में बुरे और भले पदार्थ हो जाते हैं। चतुर एवं विचारशील पुरुष ही इस बात को जान पाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “संत असंत वन्दना” प्रकरण का दोहा ७ (क) है। इस प्रकरण में संत और असंत के स्वभाव तथा गुण-दोष के भेद का सूक्ष्म विवेचन का वर्णन है।
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संत असंत वन्दना