धूम कुसंगति कारिख होई

चौपाई ६, दोहा ७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

धूम कुसंगति कारिख होई। लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई॥ सोइ जल अनल अनिल संघाता। होइ जलद जग जीवन दाता॥ ६ ॥

अर्थ

कुसंग के कारण धुआँ कालिख कहलाता है, वही धुआँ [सुसंग से] सुन्दर स्याही होकर पुराण लिखने के काम में आता है और वही धुआँ जल, अग्नि और पवन के संग से बादल होकर जगत् को जीवन देनेवाला बन जाता है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “संत असंत वन्दना” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में संत और असंत के स्वभाव तथा गुण-दोष के भेद का सूक्ष्म विवेचन का वर्णन है।

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संत असंत वन्दना