गई बहोर गरीब नेवाजू

चौपाई ४, दोहा १३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू॥ बुध बरनहिं हरि जस अस जानी। करहिं पुनीत सुफल निज बानी॥ ४ ॥

अर्थ

वे प्रभु श्रीरघुनाथजी गयी हुई वस्तु को फिर प्राप्त करानेवाले, गरीबनिवाज (दीनबन्धु), सरलस्वभाव, सर्वशक्तिमान् और सबके स्वामी हैं। यही समझकर बुद्धिमान् लोग उन श्रीहरि का यश वर्णन करके अपनी वाणी को पवित्र और उत्तम फल (मोक्ष और दुर्लभ भगवत्प्रेम) देनेवाली बनाते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।

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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता