एहि प्रकार बल मनहि देखाई
एहि प्रकार बल मनहि देखाई
चौपाई १, दोहा १४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
एहि प्रकार बल मनहि देखाई। करिहउँ रघुपति कथा सुहाई॥ ब्यास आदि कबि पुंगव नाना। जिन्ह सादर हरि सुजस बखाना॥ १ ॥
अर्थ
इस प्रकार मन को बल दिखलाकर मैं श्रीरघुनाथजी की सुहावनी कथा की रचना करूँगा। व्यास आदि जो अनेकों श्रेष्ठ कवि हो गये हैं, जिन्होंने बड़े आदर से श्रीहरि का सुयश वर्णन किया है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “कवि वन्दना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा पूर्ववर्ती महाकवियों की वंदना और विनम्र भाव से रघुपति-कथा रचने के संकल्प का वर्णन है।
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कवि वन्दना